Monday, October 27, 2008

` मिट्टी का दिया `

मिट्टी का दिया
मिट्टी का दिया
कितना सुंदर है
यह मिट्टी का दिया
छोटा छोटा दिया
दिपावली के दिन
पूजा के दिन
पूजा के स्थान पर
घर के दरवाजे पर
जगमगाते दिया
एक दिया
अंधकार को
मिटाने के लिये
काफी है।

Friday, May 30, 2008

््् दो बच्चे ्््

््् दो बच्चे ्््
दो बच्चे, भाई-बहन
दो बच्चे खेल रहे हैं
ना घर है, ना कमरा
खुला आसमान के नीचे
आग की तरह धूप में
सुबह से शाम तक
बच्चे रहते हैं, वहां पर
रेत में मिट्टी में खेलते हैं
गरीब मजदूर
के बच्चे, मां बाप
काम कर रहे हैं
बच्चे मां बाप को देख रहे हैं
कि मां-बाप जल्दी से
हमें घर ले चलो
अब तो शाम हो गई है
््््््््््््््््

Tuesday, May 6, 2008

कच्चे आम

कच्चे आम
आम के पेड़ में
लगे हुए हैं
कच्चे आम
कुछ छोटे छोटे आम
कुछ बड़े बड़े आम
हरे हरे रंग के आम
कितने अच्छे दिख रहे हैं
लागे हुए कच्चे आम
हरे रंग के पत्तों के बीच
अच्छे लगते हैं
कच्चे कच्चे आम
बच्चे तोड़ते हैं आम
मन भावन कच्चे आम

Saturday, January 19, 2008

Wednesday, January 16, 2008

''सुबह का समय''


''सुबह का समय''



सुबह का समय है,


जब हम सोते रहते हैं,


तब हमें चिड़िया की,


चीं चीं करती आवाज,


सुनाई देती है,


उस आवाज से हमारी नींद,


खुल जाती है,


तब हमें मालुम होता है कि,


सुबह हो गई है,


बच्चे भी,


उठ जाते हैं,


देखते है मनोरम दृश्य,


जमीन पर,


दाने बिखरे हुए हैं,


चिड़िया उन दानों को,


चुग-चुग कर खा रही है,


पानी पी रही है,


माताऐं भी खुश हैं,


कि बच्चे भी,


चिड़ियों का देखा देखी,


कुछ खा ले रहे हैं

Thursday, January 3, 2008

॰॰॰॰॰॰॰प्रार्थना॰॰॰॰॰॰॰॰


॰॰॰॰॰॰॰प्रार्थना॰॰॰॰॰॰॰॰

तुफानी झील से जो
पार नैय्या ले जाये
झंझावतों से लड़कर
द्रढ़ता से खड़े रह जाये
मौंजों में भी जिसके

पांव नहीं डिगे
वही है असली इंसा
जिससे ना जाने कब
हम मिलें
बातों में जिसकी
हो सच्चाई
कामों जिसके
हो दृढ़ताई
लक्ष्य जिसका हो
भला करना
हे प्रभू मुझे
उससे ही है मिलना

नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामना

Saturday, December 8, 2007

अंधी महात्वाकांक्षाऐं

अंधी महात्वाकांक्षाऐं

जाऒ जाकर भटकी दिशाऒं को
सही राह पर लाऒ
दिल ने कर दी है बगावत
कोई तो उसे मनाऒ
अरे ॰॰॰!! ॰॰॰॰॰॰॰ हाथ
तुम्हे क्या हो गया ॰॰॰॰॰॰॰॰?
जो तुम रुक गये अचानक ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰?
पग ॰॰॰॰॰॰!!
तेरी डगर तो वहां है,
फिर इस राह ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰!!॰॰॰॰॰॰॰॰॰
कैसे अचानक ॰॰?
उफ॰॰॰!!!!॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰!!॰॰॰॰॰॰
आंखे भी मरुस्थल में,
॰॰॰ हरियाली देख रही हैं॰॰॰
कानों को भी सत्य बातें ॰॰॰॰
कटु लग रहीं हैं॰॰॰॰॰॰॰॰॰
रुको॰॰॰॰॰॰॰॰ ठहरो॰॰॰॰॰॰॰॰॰ सोचो॰॰??
चित्त को समझाऒ॰॰॰॰॰॰
अंधी महात्वाकांक्षाऒं के
॰॰॰॰॰॰॰॰॰फेर में मत आऒ
बचा है वक्त अभी भी ॰॰॰॰
लौऽऽट ॰॰॰॰॰आऒ॰॰॰
यथार्थ से दूर मत जाऒ॰॰॰॰॰॰॰॰
रुक जाऒ ॰॰॰॰॰॰रुक जाऒ
अंधी महात्वाकांक्षाऒं को॰॰॰॰॰॰
परास्त कर भगाऒ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰।